Wednesday, January 28, 2015

गणतंत्र दिवस के अतिथि


अनुज लुगुन ने अमेरिकी साम्राज्यवाद के प्रतिनिधि, अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के भारत आने पर यह कविता लिखी है. ओबामा इसे यकीनी बनाने के लिए आए हैं कि भारतीय राज्य जनता के जल-जंगल-जमीन को छीन कर साम्राज्यवादी कंपनियों को सौंपना जारी रखे और इस तरह अमेरिकी साम्राज्य के वजूद को कायम रखे. साथ में, ब्राह्मणवादी-सामंती-फासीवादी परियोजनाएं भी चलती रहें.




सिर्फ इतना ही कर सकता हूँ
कि आज के तुम्हारे कार्यक्रम में
मैं शामिल नहीं होऊंगा
और कर भी क्या सकता हूँ
तुम्हारे अभेद्य सुरक्षा कवच के सामने.?
वैसे और क्या हो सकता है इससे बेहतर
तुम्हारा लोकतांत्रिक बहिष्कार
कि लोकतंत्र के कथित महाप्रभु को
उसी के जुमलों से जवाब दिया जाए?

जब सारी दुनिया
तुम्हारे ताकत के दंभ और शोहरत की
अंधभक्ति कर रही हो
तब मेरे ही भाई-बन्धु हसेंगे
मेरे इस निर्णय पर
और सीआईए अगर
इसकी भी सूचना दे दे
तो शायद तुम्हें भी
हिंदी के इस आदिवासी कवि पर हंसी आ जाए

आज कार्यक्रम में शामिल नहीं होऊंगा
तो इसका मतलब
तुम मुझसे बेहतर समझते हो कि
मैं तुम्हारे हर उस निर्णय में शामिल नहीं हूँ
जिसने दुनिया को ‘डॉलर’ की जंजीर पहनाई है
जिसने जने हैं दुनिया में
नाटो, खाड़ी, तालिबान, ईराक
लीबिया, उ.कोरिया, ईरान
और भी ऐसी अनगिनत अंधेरी खाइयां
जिनमें मानवता दफ़न की जा रही है

मेरे इस इनकार का मतलब
तुम भली भांति समझते हो
कि मैं तुमसे और तुम्हारे अधिकांश
पूर्वजों से असहमत हूँ
तुम यह भी जानते हो कि
आज तुम जिस जमीन पर खड़े होकर
आतंकवाद और विश्व शान्ति की बात कर रहे हो
उसी जमीन के खिलाफ
तुम्हारे पूर्वजों ने जहाजी बेड़ा भेजा था

मुझे पता है
तुम और तुम्हारा सीआईए
कहेगा कि मैं सोवियतों का पिछलग्गू रहा हूँ
कहोगे कि मैं चे, कास्त्रो या शावेज का गुप्तचर हूँ
कहोगे कि मैं तालिबानी हूँ
कहोगे कि मैं इस्लामिक स्टेट का हूँ
तुम कुछ भी कहोगे और उसे साबित भी कर दोगे
लेकिन तुम कभी नहीं कहोगे कि
मैं ब्लैक हिल्स या डकोटा प्रान्त का वंशज हूँ
नहीं कहोगे कि मैं रेड इंडियनों का वंशज हूँ
ऐसा कहकर तुम और सीआईए
कभी भी अपने इतिहास का
नकाब नोचने की हिमाकत नहीं करेगा

मुझे पता है
तुम कुछ भी ऐसा नहीं करोगे
जिससे साबित हो कि
तुम्हारे सिवाय और भी सभ्यता रही है
और भी मौजूद हैं दूसरे सहजीवी विकल्प

आज तुम बापू को धन्य धन्य कहोगे
मार्टिन लूथर किंग जूनियर की दास्तान कहोगे
और जब कल यहाँ से वापस लौट जाओगे
हथियारों के अंतराष्ट्रीय बाजार में
तुम्हारी रैंकिंग फिर से सबसे ऊपर होगी

फिर से होगी
तीसरी-अश्वेत-अफ़्रीकी-दुनिया में
तुम्हारे लड़ाकू युद्ध पोतों
और जहाजी बेड़ों के उतरने तक
हथियारों की काला बाजारी

आज मेरे देश की
बलिदानी धरती पर होने के बावजूद भी
तुमसे दूसरी छोर पर रहूँगा
मैं यहाँ अपने जंगलों और नदियों के साथ
यहीं अपने जनवादी गणतंत्र का गीत गाऊंगा |