Wednesday, February 4, 2015

मुसहर बस्ती संघर्ष समिति छित्तूपुर (बीएचयू),वाराणसी ने अपनी मूलभूत अावश्यकताओं के लिए दिया धरना


गत 11 जनवरी 2015 को कड़ाके की ठण्ड में भी अपने मूलभूत अावश्यकताओं से वंचित मुसहरों ने जीवन से तंग आकर डीएम कार्यालय पर धरना दिया. यह बस्ती भारत की तथाकथित नंबर वन रही यूनिवर्सिटी बीएचयू के बगल में है और खास बात यह है कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र भी है. बस्ती के लोगो ने मिलकर अपनी समस्याओं के निदान के लिए मुसहर बस्ती संघर्ष समिति नामक संगठन का निर्माण किया. इसके अध्यक्ष केवल और सचिव सुभाष हैं.

मुसहर बस्ती संघर्ष समिति छित्तूपुर (बीएचयू),वाराणसी ने मांग की है कि डीएम एक बार चल कर उनकी बस्ती का निरीक्षण करें क्योंकि इलाके में ऐसी कई समस्याएं हैं जिसके चलते यहां के लोग आज़ादी के इतने सालों बाद भी अमानवीय परिस्थितियों में रहने के लिए मजबूर हैं. लोकतान्त्रिक देश कि घोषणा होने के बाद जमींदारी उन्मूलन कानून से लेकर ऐसी-एसटी के लिए विशेष तौर पर बनाये गए अन्य कानून भी लागू हुए. इसके बावजूद आज तक उन्हें जमीन का पट्टा  नहीं मिल पाया है. जिस जमीन पर ये लोग 250 सालों से रहते आ रहे हैं आज तक उनको उसका उनको कोई कागज नहीं मिला. ऊपर से आस-पास के कुछ उच्च जाति के दबंग भी उनकी जमीन पर कब्ज़ा करते जा रहे हैं और इन लोगों को इनकी जमीन से बेदखल करने की कोशिश में लगे हैं. छोटी  सी जगह में करीब 200 लोग रहते हैं लेकिन उनके पास रहने के लिए ना कोई घर है, ना पीने के लिए पानी, ना ही शौचालय की व्यवस्था महिलाओं सहित सभी लोगों को शौच के लिए खुले में जाना पड़ता है.

ऐसा नहीं है कि छित्तूपुर ग्राम सभा में उनके नाम पर आवास की योजना ना आयी हो. लेकिन जब भी कोई ऐसी योजना आई तो प्रधान ने दबंगों के प्रभाव में आकर जमीन को विवादित होने का बहाना बनाया या अन्य कोई बहाना बनाकर ये आवास अन्य लोगों को आवंटित कर दिये.
   
इस समिति का कहना था कि जिस जमीन पर वे लोग कई पीढ़ियों से रहते आ रहें हैं उस जमीन का पट्टा उनके नाम कर दिया जाये. इसके अलावा उन्होंने मांग की कि सरकार इंदिरा गांधी आवास योजना या ऐसी अन्य योजनाओं के तहत घर बनवाये तथा साथ ही आने-जाने का रास्ता भी मुहैया कराये.

समिति का कहना है कि आखिर वे भी इस देश के नागरिक हैं और देश के संसाधनों पर उनका भी बराबर का अधिकार है. फिर भी वे लोग जानवरो जैसी जिंदगी जीने को मजबूर क्यों हैं ? मोदी के विकास मॉडल व स्मार्ट सिटी योजना में उनका क्या स्थान होगा ?

डीएम के उरस्थित ना होने के कारण करीब 3.30 बजे सिटी मजिस्ट्रेट ने धरना स्थल पर आकर ज्ञापन लिया. संगठन के पदाधिकारियों व अन्य लोगों ने धरने को सम्बोधित किया और अपनी-अपनी बात रखी. इसके समर्थन के लिए बीएचयू-आईआईटी, बीएचयू के कई छात्रों के साथ-साथ शहर के बुद्धिजीवी भी आये और सबने अपनी बात रखी. जिसमे मुख्य रूप से डा० रमन (विद्यापीठ),प्रो० प्रमोद बागडे (बीएचयू), सामाजिक  कार्यकर्ता पारमिता, प्रवाल,अशोक समदर्शी, शिव प्रसाद (एडवोकेट), विक्रम (पत्रकार), बब्बर, प्रीति, हिमांशु, हेमंत (आईआईटी, बीएचयू), राजेश , सुशील, मनीष , विनोद  (बीएचयू) आदि लोग शामिल हुए.|

मजदूर-किसान नेता कन्हैया ने अपने गीतों से माहौल में गर्मजोशी बनाये रखी. धरने का संचालन सामाजिक कार्यकर्ता व शिक्षक वाशीम अहमद ने किया.