Friday, August 2, 2013

भगत सिंह छात्र मोर्चा ने बीएचयू के विभिन्न गेटों पर सिलसिलेवार कार्यक्रम का आयोजन किया :

    फीस वृद्धि , परिसर में लोकतंत्र बहाल  करने एवं छात्र अधिष्ठाता विनय कुमार सिंह के ऊपर लगे गबन के आरोप से सम्बंधित प्रो० चन्द्रकला पड़िया रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग को लेकर भगत सिंह छात्र मोर्चा ने  बीएचयू के विभिन्न गेटों पर सिलसिलेवार कार्यक्रम का आयोजन किया |

 


  दिनांक : २४ जुलाई को शाम ५ बजे , छित्तुपुर गेट बीएचयू  पर एक आम सभा का आयोजन किया ,जिसकी सुरुआत जनगायक युद्धेश के  गीतों और  भाषणों से हुई जिसमे   बहुत सारे छात्रों ने भागीदारी की और विभिन्न छात्रों ने अपनी बात  रखी |


    फीस वृद्धि वापस लो! ,छात्र संघ-कर्मचारी संघ-शिक्षक संघ  बहाल करो! ,परिसर में लोकतंत्र बहाल करो एवं प्रशासन की तानाशाही नहीं चलेगी! आदि नारे भी लगाये गए | और इसी क्रम में दिनांक : 26  जुलाई को शाम ५ बजे सीर गोवर्धन गेट बीएचयू पर एक सभा एवं मशाल सांस्कृतिक मंच की तरफ से एक नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया | नाटक का शीर्षक था "शिक्षा का शर्कस" जो की दुकानदार भईयों और नौजवान साथियों को खूब भाया,जनगायक युद्धेश ने अपनी कोरस टीम के साथ क्रन्तिकारी-जनवादी गीत प्रस्तुत किये और अपनी सभी जनवादी  मांगों को लेकर जमकर  प्रशासन विरोधी नारे लगाये गए |

 


   अंत में २८ जुलाई को शाम ५ बजे ,मुख्य द्वार बीएचयू पर जूलूस एवं सभा का आयोजन हुआ जो मुख्य द्वार से सुरु होकर रविदास गेट होते हुए पुनः जूलूस मुख्य द्वार पर पहुच कर सभा में बदल गया जूलूस में भारी संख्या में छात्रों ने भागीदारी की , फीस वृद्धि ,प्रशासन की तानाशाही ,एवं लिंगदोह कमेटी की सिफारिसो के खिलाफ नारे लगाये गए |

    सभा में सभी छात्रों ने अपना-अपना आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि " प्रशासन ऑनलाइन फॉर्म ,काउंसलिंग करके दूर-दराज के गांवो से आये गरीब मजदूर ,किशानो एवं मध्यमवर्गीय परिवारों  के बच्चों को विश्वविद्यालय में आने से रोक देना  चाहता है |

 


     विश्वविद्यालय की मेस ,होस्टल ,कैंटीन जैसी  सुविधाओ का निजीकरण कर निजी कंपनियों के हाथों में सौप जा रहा  है और व्यावसायिक कोर्सो को बढाया जा रहा है जिससे भारी मात्रा  में छात्रों से फीसे वसूली जा रही है | कैम्पस के सभी चौराहों पर चौकिया बनायी जा रही है , बाहर से पुलिस और सेना को बुलाकर प्रश्रय दिया जा रहा है,कैम्पस को सैन्य छावनी में तब्दील कर दिया गया है |     

    और कहा कि "जब आधुनिक शिक्षा,ज्ञान के केंद्र विश्वविद्यालय में लोकतंत्र नहीं होगा तो देश में लोकतंत्र कैसे हो सकता है |"

 

      बीएचयू प्रशासन द्वारा बात-बात पर छात्रो-कर्मचारियों  को यहाँ तक कि शिक्षको  को भी नोटिस जारी किया जा रहा है ,ब्राम्हणवादी बीएचयू  प्रशासन पूरी तरह से तानाशाही पर उतर आया है " इसी वजह से आज हम छात्र सड़को पर उतरने के लिए मजबूर है |