Thursday, December 18, 2014

काकोरी के शहीदों की याद में : काकोरी के शहीदों को सलाम !


     काकोरी के शहीदो के याद में आज भगत सिंह छात्र मोर्चा ने एक श्रद्धांजली  सभा और परिचर्चा का आयोजन बी एच यू के एम्पीथिएटर मैदान में किया.जिसमे पहले शहीदो के याद में दो मिनट का मौन रखा गया.इसके बाद कार्यकर्म की शुरुआत करते हुए संग़ठन के सहसचिव विनोद शंकर ने काकोरी के शहीदो को याद करते हुए भारतीय क्रांति में उनके योगदान को सभा में रखा और उपस्थित लोगो से निवेदन किया की सभी उन पर और आज के समय में उनकी प्रासंगिता पर अपनी बात रखे । इसके बाद सभा में उपस्थित संगठन के पदाधिकारी, सदस्यों और छात्रों ने अपनी -अपनी बाते रखी.जिसमे साथी रोहित ने कहा की हम जहा है वही अपने जनवादी अधिकारों के लिए लड़े और हमारे आस-पास जो जनता अपने अधिकारों और हको के लिए लड़ रही है तो हम उनके साथ खड़े हो। आज काकोरी की शहीदो को हमारी यही सच्ची श्रद्धांजलि होगी । इसके बाद अध्यक्ष शैलेश ने कहा की काकोरी के शहीद जिस सपने के लिए लड़े थे जिस शोषण और उत्पीड़न को वो ख़त्म कर देना चाहते थे । आज वो पहले से भी ज्यादा तेज गति से हो रहा है.इसलिए आज के समय में काकोरी के शहीदो को याद करना उन सपनो और संघर्षो को याद करना है जिसके लिए वो शहीद हो गए.और उसे पूरा करना ही हमारे जीवन का ध्येय होना चाहिए। इसके बाद साथी धीरज और आरती ने आओ साथियो हमे इंकलाब लानी है.हम आजाद है कहा हमें आजादी लानी है.गीत गा कर शहीदो को अपनी श्रद्धांजलि दी.इसके बाद पटना से आये हमारे वरिष्ठ साथी राज किशोर जी ने काफी विस्तार से काकोरी के शहीदो पर अपनी बात रखते हुए क्रांतिकारी राजनीती की धारा पर बात की । जो अपने देश में बहुत पहले से रही है.काकोरी के शहीदो को याद करना सिर्फ एक घटना और कुछ शहीदो की शहादत को याद करना नहीं बल्कि क्रांतिकारी राजनीती की पूरी धारा को याद करना है.जो इस देश में आज भी बढ़ रही है.जिसके नेतृृत्व में आज भी देश की व्यापक जनता इस शोषणकरी राज्य व्यवस्था से लड़ रही है.इसके बाद उपस्थित साथियो को धन्यवाद देते हुए विनोद शंकर ने परिचर्चा का समापन कर दिया गया..

    साथियो, 
            आज ही के दिन १९ दिसंबर १९२७ को वीर क्रांतिकारियों रोशन सिंह ,अशफ़ाक़ उल्ला खां,रामप्रसाद बिस्मिल को अंग्रेजों ने फंसी दी थी | राजिन्द्र लाहिरी को दो दिन पहले ही १७ दिसंबर को गोंडा में फांसी दे दी गयी थी | राजिन्द्र लाहिरी हमारे कशी हिन्दू विश्वविद्यालय के एमए. के छात्र थे |  जिनकी उम्र उस समय २४ वर्ष थी | हमारे क्रांतिकारियों ने अंग्रेजी हुकूमत के शोषण -उत्पीड़न से जनता की मुक्ति की लड़ाई लड़ी | और अंग्रेजों द्वारा हमारे देश से लूट कर ले जा रहे खजाने को छीना | जिसे क्रन्तिकारी पार्टी के लिए चंदे के रूप में प्रयोग किया | यही वजह थी कि अंग्रेजों ने इन लोगों को फांसी कि सजा दी |
अशफ़ाक़ उल्ला खां 

  लेकिन अपने आस-पास नजर डालकर देखिये कि क्या जनता का शोषण-उत्पीड़न बंद हो गया ? क्या प्राकृतिक खनिज सम्पदाओं की लूट ख़त्म हो गयी ? क्या जनता की मुक्ति की लड़ाई ख़त्म हो गयी ? क्या जनता पर दमन बंद हो गया ? नहीं ! कतई नहीं !वह सब आज भी जारी है |
रामप्रसाद बिस्मिल 

दोस्तों , 
         आज जब गोरो के साथ समझौता हो गया है | काले अंग्रेज "ईस्ट इंडिया कंपनी" के तर्ज पर विदेशों में जाकर बहुराष्ट्रीय कंपनियों को देश को लूटने का न्योता दे रहे है | उसका नाम दे रहा है "मेक इन इंडिया" |
राजिन्द्र लाहिड़ी 

 देश भर में रेलवे,बिजली,रक्षा व अन्य सभी विभागों को निजी हाथों में सौपा जा रहा है | उसमें साम्राज्यी पूंजी का निवेश किया जा रहा है | जल-जंगल-जमीन व प्राकृतिक खनिज सम्पदाओं को हथियारों के दम पर साम्राज्यवादी कंपनियों को कौड़ियों के भाव बेचा जा रहा है | इसमे सभी संसदीय राजनितिक पार्टिया शामिल है | जो जनता इसके खिलाफ मुक्ति की लड़ाई लड़ रही है उस पर "आपरेशन ग्रीन हंट" के तहत फौजी दमन चलाया जा रहा है | और उन्हीं पुराने कानूनों के तहत देशद्रोह का मुक़दमा लगाकर लगातार जेलों में ठूसा जा रहा है | हमारा देश और हमारा भविष्य खतरे में है | अब जब छात्रों-नौजवानो का दायित्व बढ़ गया है तब हम क्रांतिकारियों की शहादत को बेकार नहीं जाने देंगे !